पूर्वी चंपारण,29 अगस्त (Udaipur Kiran) ।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम एवं सुरक्षित वातावरण निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का समाधान” विषयक एक जागरूकता व्याख्यान का आयोजन चाणक्य परिसर में किया।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) एवं लैंगिक संवेदनशीलता प्रकोष्ठ (जीएससी) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आईसीसी की अध्यक्ष प्रो. शहाना मजूमदार के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को सुरक्षित, सहयोगपूर्ण एवं समावेशी वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विश्वविद्यालय में सक्रिय आईसीसी एवं जीएससी की कार्यप्रणाली और गतिविधियों से परिचित कराते उन्होंने कहा कि आपकी जागरूकता, संवेदनशीलता और साहस ही ऐसा भविष्य गढ़ेंगे जो भय और असमानता से मुक्त होगा।
प्रबंधन अध्ययन विभागाध्यक्ष एवं लैंगिक संवेदनशीलता प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ. सपना सुगंधा ने नवप्रवेशित स्नातकोत्तर छात्रों को भारत में महिलाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न कानूनी प्रावधानों एवं सुरक्षा उपायों की जानकारी देते हुए छात्रों को निडर, आत्मनिर्भर और सजग बने रहने के लिए प्रेरित किया। वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की उत्पीड़न की घटना को नज़रअंदाज़ करना या चुप रहना अन्याय को बढ़ावा देना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सहपाठियों में होने वाले अनुचित व्यवहार की रिपोर्ट करने में भी जिम्मेदारी निभाएं और परिसर में सहानुभूति का वातावरण बनाएँ। कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रीति बजपाई, एसोसिएट प्रोफेसर, प्राणीशास्त्र विभाग एवं आईसीसी सदस्य के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे प्रयासों से भविष्य में महिलाएँ भय और असमानता से मुक्त होकर शिक्षा और करियर का मार्ग प्रशस्त कर सकेंगी।
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(Udaipur Kiran) / आनंद कुमार
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